
अकबर (Akbar) राजा अपने मंत्री बीरबल (Birbal) से बहुत खुश रहता था और हर बात पर उससे सलाह लेता रहता था जिसकी वजह से दूसरे दरबार के मंत्री बीरबल से बहुत चिड़ते थे| एक दिन सब मंत्रियों ने मिलकर बीरबल से बदला लेने के लिए तरकीब सोची| अकबर राजा के पिता स्वर्ग में थे और अकबर उनसे बहुत प्यार करता था इसलिए मंत्रियों ने इस बात का फायदा उठाने की सोची|
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मंत्रियों ने शाही नाई को बुलाया और उसे सोने के सिक्को का लालच दिया| शाही नाई ने पहले को मना किया लेकिन फिर पैसो के लालच में आकर वह भी मंत्रिओं के साथ मिल गया| फिर वह अकबर राजा के पास गया और बोला, राजा जी आपके पिताजी सुबह मेरे सपने में आये और बोले मेरे बेटे अकबर को बोलना की मैं यहाँ खुश हूँ और आपके और बीरबल के किस्से सुनता रहता हूँ लेकिन अगर बीरबल मेरे पास आ जाये तो मुझे बहुत ज्यादा ख़ुशी होगी|
यह सुनकर राजा अचम्भित हो गए और बोले मैं अपने पिताजी से बहुत प्यार करता हूँ इसलिए मैं उनकी ख़ुशी के लिए उनकी बात मान लूंगा| अकबर ने अपने सिपाईयों को भेज कर बीरबल को बुलाया और उसे पूरी बात बताई| बीरबल यह सुनकर समझ गया की यह सब शाही नाई और मंत्रियों का ही काम है| बीरबल ने सोच कर बोला राजा जी मुझे एक दिन दीजिये मैं अपने सारे जरुरी काम निपटा लूं | राजा मान जाता है और सारे मंत्री भी खुश हो जाते हैं की अब तो बीरबल नहीं बचेगा|
बीरबल ने अपने घर के बहार एक कब्र खुदवाई और उसमे एक गुप्त रास्ता बनवाया जो सीधा उसके घर पर निकलता था| फिर वह अगले दिन राजा के पास गया और बोला की हमारे यहां पर एक रिवाज है की हमें अपने घर की आगे की कब्र में दफनाया जाये| राजा यह बात मान गया और अगले दिन बीरबल को कब्र में दफना दिया| सब मंत्री खुश हो गए की चलो अब बीरबल से पीछा छूटा|
बीरबल कब्र से निकल कर घर पर आराम करने लगा और तीसरे दिन राजा से मिलने आया| राजा उसे देख कर आश्चर्य चकित रह गया और बोला तुम तो मर गए थे| बीरबल मुस्कराते हुए बोला राजा जी मै आपके पिताजी से मिला वह मुझे मिलकर बहुत पसंद हुए और बोले यहाँ पर कोई नाई नहीं है अगर तुम अपने साथ शाही नाई को भी ले आते तो अच्छा होता| बस उनकी यह बात सुनकर मैं वापिस आ गया शाही नाई को लेने|
शाही नाई यह बात सुनकर डर गया और राजा से माफ़ी मांगने लगा| नाई ने फिर पूरी बात राजा को बताई की कैसे उसने मंत्रियों के साथ मिलकर यह सब योजना बनाई| राजा यह सुनकर बहुत गुस्सा हुआ और नाई और सब मंत्रियों को जेल कोठरी में दाल दिया|
कहानी से सीख (Moral of the Story):
हमें मुश्किल समय में घबराना नहीं चाइये और दिमाग से काम लेकर मुश्किल से बहार निकलना चाहियें|